सीता-सा धैर्य, सावित्री-सा सत्य,
दुर्गा-सा साहस घर-घर हो।
लक्ष्मी-सा मंगल हर आँगन महके,
भारत को उज्ज्वल अंतर हो।
राधा-सा त्याग अमर हृदय में,
पार्वती-सा तप निष्काम रहे।
अनसूया-सी पावन मर्यादा,
नारी का जीवन-धाम रहे।
गार्गी की प्रज्ञा जागे,
मैत्रेयी का ज्ञान विशाल।
सावित्री बाई शिक्षा-ज्योति बनकर,
हर पथ करे उज्ज्वल-भाल।
रण में लक्ष्मीबाई की हुंकार,
वीरांगनाओं का मान बढ़ाए।
किरण बेदी की कर्मनिष्ठा,
सेवा का अभियान बने।
फातिमा बीबी के न्याय-पथ से,
सत्य सदा सम्मानित हो।
भारत विश्ववंदित हो।
लता के सुरों से नई पहचान,
कल्पना ने नभ को छुआ महान।
शिवांगी, अवनी, भावना की उड़ानों से,
ऊँचा करें भारत का मान।
संतोष के संकल्प से,
हिमशिखरों का सम्मान।
हरमनप्रीत की दृढ़ता से,
स्मृति का आत्मविश्वास महान।
भारत की हर बेटी लिखे,
परिश्रम का स्वर्णिम इतिहास।
शिक्षक, वैज्ञानिक, चिकित्सक,
सैनिक, न्यायाधीश—बढ़ाएँ भारत का प्रकाश।
संस्कारों की सादगी बनकर,
करुणा का विस्तार करें।
श्रम, सेवा, साहस, समर्पण से,
नवयुग का श्रृंगार करें।
अमर रहे भारत की नारी,
अमर रहे उनका सम्मान।
जय-जय भारत की वीर नारियाँ,
भारत की महिलाएँ महान।
-पूर्णिमा सिंह
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