लैला मजनूं के गाने, आज नहीं मैं गाऊंगा।
सच्चाई को कहने में तनिक नहीं घबराऊंगा।
आजादी चुप बैठी है, सत्ता के गलियारों में।
भारत बाघ जा मिल बैठे पाक के सियारों में।
मौन हो देख रहे जन, बन दुश्शासन गांधारी।
बिलख रही भारत मां, देख वक्त की लाचारी।
मौन-मूक शहादत पे, इतिहास मौन पड़ा हुआ।
तात्या,भगत,वीरों पे,आजाद भारत खड़ा हुआ।
गुवहाटी से चौपाटी तक शहीदों की माटी है।
काका,लाला,नाना,लक्ष्मी गांधीजी की लाठी है।
भारत के कर्णधार जो लाल किले से बोल रहा।
देख सीमा पे आतंक को,बाजू रक्त खोल रहा।
ये पटेल,नेहरू,मंगल,बाबा साहेब की थाती है।
यहां बच्चे-बच्चे वीरबहादुर,शेर वाली छाती है।
राष्ट्रध्वज है प्यारा अपना, गर्व से इठलाऊं मैं।
लाज ना बचा पाया तो, जिंदा ही मर जाऊं मैं।
तिलक, मौलाना,राजगुरु ढाल बन के खड़े रहे।
बलिदान सागर गोपा भी अपनी जबां अड़े रहे।
अमर शहीदों के बलिदान,कोटि-कोटि वंदन हो।
दीप जले वेदी पे,जहां शहीदों के अभिनंदन हो।
-महेश तंवर
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