भारत की माटी का लाल महान,
शास्त्री जी थे सच्चे बलिदान।
सादगी जिनकी पहचान रही,
ईमानदारी जिनकी जान रही।
छोटा कद, मगर हिमालय सा मन,
कठिन समय में न छोड़ा वचन।
“जय जवान, जय किसान” का स्वर,
आज भी गूँजता नभ-मंडल पर।
जब-जब सीमा पर संकट आया,
भारत माँ ने वीर बुलाया।
शास्त्री जी ने दृढ़ता दिखाई,
शौर्य की गाथा जग को सुनाई।
पाक युद्ध में सिंह बने वे,
वीर सपूत की ललकार तले वे।
सेना का मनोबल ऊँचा किया,
शत्रु को साहस से झुका दिया।
किसान को भी सम्मान दिया,
हल और खेत को मान दिया।
भूखे भारत को राह दिखाई,
अन्न-उत्पादन की लौ जगाई।
छोटे कद में विराट विचार,
शौर्य-गाथा अमिट और अपार।
भारत-भू की ये अमर पुकार,
शास्त्री जी को शत-शत नमस्कार।
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