हम उसके न हुए, ये मुक़द्दर की बात थी,
शायद उसे चाहना भी हमारे इख़्तियार में न था।
ग़म तो उस शख़्स के किसी और का हो जाने का है,
जिसके सिवा सुकून के तसव्वुर में भी कोई और न था।
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