वो दिन वो पल,
मुझे आज भी याद है
जब तुम
अज़नबी से खास हो गई !
जब से तेरी यादों को,
संजोने क्या लगा
लगता है दिल का तुम,
हर एक एहसास हो गई !
पता नहीं हमारे बीच में,
ऐसा क्या था
जो तुम मेरे दिल के,
इतने पास हो गई !
तुम्हारी देह का,
तो मुझे पता नहीं
पर मेरी देह की,
तुम हर सांस हो गई......!
- कुमार कृष्णा "मोहन"
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