काली बरसात की रात, प्रिय
अमावस की डरावनी रात में,
कांप जाऊं जब बिजली कड़के,
आती जब भयंकर आवाज, प्रिय
काली बरसात की रात, प्रिय
दीपक जला कर रखती हूं,
खिड़की को जब बंद करने जाऊं,
देख परछाई अपनी ही
डर जाती हूं मैं आप, प्रिय
काली बरसात की रात, प्रिय
एक तो मौसम बरसात का
विरहनी के आघात का,
वादा करके भी आए नहीं
सताती है मुझे तेरी याद, प्रिय
काली बरसात की रात, प्रिय
एक तो रात अंधेरी है,
दूजे तुम मेरे पास नहीं,
बरसात भी अगन लगा रही,
किस से करूं मैं बात, प्रिय
काली बरसात की रात, प्रिय
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