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मृत्यु (जीवन का अटल सत्य)

                
                                                         
                            कि तुम क्यों नहीं समझते?
                                                                 
                            
क्यों नहीं समझते तुम......
इन हंसी ठिठोलियो के बीच जीवन,
पानी के बुलबुले पर बैठा आदम,
राई-2 पाई-2 जुटाकर
दस्तक देगा महाश्मशान में।
कि तुम क्यों नहीं समझते.......
वर्चस्व,वैभव, विशिष्टता के दौर में,
अंधाधुंध चहलकदमी करते ,
तुम पहुंच रहे हो महाबाजार में,
और इन्हीं बाजारों के बिल्कुल बगल से,
खुलता है मृत्यु लोक का महाद्वार।
कि तुम क्यों नहीं समझते ......
क्यों नहीं समझते तुम.?
                                  
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6 hours ago

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