आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दोस्ती का मिलन

                
                                                         
                            दोस्ती का मिलन
                                                                 
                            

बरसों बाद जब दो दोस्त मिले,
तो आँखों में बचपन के मौसम खिले।
न कोई शिकवा, न कोई सवाल,
बस यादों ने फिर खोल दिए अपने जाल।

वो गलियाँ, वो खेल, वो छोटी-सी बात,
वो घंटों की हँसी, वो दिन और वो रात।
समय ने भले ही राहें बदल दीं,
पर दोस्ती की डोर कहाँ कभी कम हुई।

एक ने कहा—“तू अब भी वैसा ही है,”
दूजे ने हँसकर कहा—“तू भी तो वैसा ही है।”
फिर दोनों की आँखें थोड़ी नम हो गईं,
पुरानी यादें जैसे फिर से जवान हो गईं।

मिलना तो बस एक बहाना था,
यादों को फिर से गले लगाना था।
दूरियाँ चाहे कितनी भी मजबूर करें,
सच्चे दोस्त दिल से कभी दूर नहीं होते।

आज फिर दो दोस्त साथ खड़े थे,
जैसे बीते कल के सारे पल सामने पड़े थे।
समय ने बहुत कुछ बदला, मगर एक बात वही रही—
दोस्ती सच्ची हो तो हर मुलाकात,
दिल में हमेशा के लिए याद बनकर रहती है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर