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ममता की मूरत

                
                                                         
                            जब से आंखें खोली है,
                                                                 
                            
एक प्यारी सूरत देखी है।
मंदिर की पाषाणों से प्यारी,
ममता की मूरत देखी है।
पहले भोजन मुझे कराकर,
खुद भूखी वह होती रही।
लोगों के तानों को पीकर,
खुद घुट-घुटकर वह रोती रही।
उम्मीद भरी निगाहों से पल-पल वह देखती है मुझको,
जैसे सींचता है माली, वैसे ही सींचती है मुझको।
दुःख ही उसके खाद है आंसू ही उसके पानी हैं,
अपने बच्चों के खातिर हर मां की यही कहानी हैं।
एक दिन लाऊंगा ऐसा आंसू होंगे उल्लास के,
आसमान में तारे जितने खुशियां उसके पास में।
कमी न होगी किसी चीज़ की जो मांगे ले आऊंगा,
इतना सब करने के बाद भी कर्ज़ चुका न पाऊंगा।।

- किशन
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2 वर्ष पहले

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