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देशप्रेम का गीत ना गाया जायेगा

                
                                                         
                            देश भक्ति के कई गीत मुंह से गुनगुना कर
                                                                 
                            
हाथों में छतों और गाड़ियों पे तिरंगा सजा कर
केसरिया, भगवा, कपड़ा खुद को पहना के
चौड़े होगे आज सभी खुद को देश भक्त बता के

महीनों से पड़े गंदे नगर गली चौक आज निखरेगे
काली सीरत वाले उजली पोशाक में खूब चमकेगे
भाषण में अपने हर भारतवासी को अपना भाई बोल
देश बेचने वाले भी आज भारत माता की जय बोलेंगे

मन तो करता है मेरा भी बहुत कि मैं भी कुछ प्रेम भरा बोलूं
अर्पण कर एक गीत भारत मां को कुछ धरती के नाम लिखूं
पर कलम पकड़ते हाथों में कुछ दृश्य बदल सा जाता है
जब मन विचलित और दर्द में हो कैसे आखिर प्रेम लिखूं

कलम उठाओ तो कानों में मासूमों की चीख सुनाई देती है
बच्चे से बूढ़े तक हर शख्स की दर्द भरी पीर सुनाई देती है
उकता कर गर कानों पर हाथ भी रखूं तो भी कोई राह नहीं
आंखे बंद रखूं या खुली मन में एक तस्वीर सी खींची रहती है

कैसे फेर लूं नज़र बताओ हाथ फैलाए सड़क पर नन्हे मुन्नों से
कैसे न करूं गौर समाज का अत्याचार ढोते उन बूढ़े कंधों पे
दिख ही जाती है कहीं न कहीं किसी गरीब की बेगुनाही सजा पाते हुए
अनदेखा कैसे कर दूं घुटने में मुंह छुपाए एक बेचारी को सिसकते हुए

दिल तो चाहता है मेरा भी सारे जहां से अच्छा देश हमारा गाउं
हम जीयेंगे और मरेंगे ए वतन तेरे लिए ये लाइन फिर से दोहराऊं
पर तभी पंखों से लटका छात्रों का शव शिक्षको की झुकी नज़र दिख जाती है
थोड़ा सा पैसा खा कर के कोई घर की ही ईट घर से धोखा करते पाई जाती है

रोज एक नई ख़बर कैसे आज शासन प्रणाली हमारी अमीर के हाथो बिक गई
दिखता है कैसे गरीब के हक का न्याय इन जयचंदो की कुर्सी खा गई
पता तो सबको हैं यहां कि उजले समाजसेवक कौन से काले धंधे करते हैं
पर कमाल की बात तो ये है कि उनकी घी चुपड़ी रोटी देश के रक्षकों को भा गई

जानते है हम भी कि ये आजादी भारत ने अग्रेंजो से तोहफे में नहीं पाई है
इसके लिए सूनी हुई है कई मां की गोद जवानों ने सीने पे गोली खाई है
पर शहीदों कुर्बानी का क्या मोल जब भारत आज भी पराधीन है
जनता ने बिकाऊ होके भ्रष्ट नेता बिठाय सत्ता पे देशभक्तों ने जिसके लिए लाठी खाई

नहीं है हमारे पास इतना मोटा परदा जिसे आंखो पे डाल हम अंधे हो जाए
नहीं है कोई पास कोई लोहे का तकिया जिसे कानों पे रख बहरे हो जाएं
हर तरफ़ चीखे है लहू लहू है हर कण तो ऐसे में हमसे ना मुस्कुराया जायेगा
माफ कर दो मुझे मेरे देशवासियों मुझसे सिर्फ आज भर के लिऐ कोई देशप्रेम का गीत ना गाया जायेगा
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9 घंटे पहले

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