चांद उगा है
बादलों के पार से
आकाश मौन
वर्षा रात में
अश्रु साथ बहते
अधर मौन
हरित धरा
पावस चहुंओर
हृदय शांत
प्रसून खिले
प्रेम लता लिपटी
प्रसन्न मन
-काव्यांशी श्रीवास्तवा
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