शोर बहुत है तेरे शहर में
फिर हर शख्स बहरा क्यों है ?
मासूम है निगाहें तेरी
दिल में राज गहरा क्यों है ?
बेपनाह मोहब्बत थी तुझसे
किस्मत में तू बेवफा क्यों है?
ठहर गया निगाहों से तेरी
भागता अब बदहवास क्यों है?
नींद आती बोझिल आँखों में
रात भर फिर जागता क्यों है?
थक गये कदम चलते चलते
फिर तू मीलों चलता क्यों है?
ख्वाब बेशुमार तेरी आंखों में
फिर वो ख्वाब टूटता क्यों है
तेरे आने से रोशन हुआ जहां
इस ज़हन में अंधेरा क्यों है?
यूँ तो कई चाहने वाले तेरे
फिर दिल तुझ पे कुर्बान क्यों है?
बहुत मासूम है मुस्कान तेरी
आँखों में अश्क की लड़ियाँ क्यों है?
संग चलने का वादा किया था
आज फिर सफर ये तन्हा क्यों है?
खो गया जो ज़माने की भीड़ में
दिल तू उसे ढूंढता क्यों है?
-कविता चौहान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X