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गालियों, तिरस्कार और अपमान के साथ।

                
                                                         
                            जो आया है सो जाएगा
                                                                 
                            
तुम्हें भी जाना है
पर नहीं सोचा था
इस तरह जाना चाहते हो तुम
अपनी दुर्गति के साथ
गालियों, तिरस्कार और अपमान के साथ।
तुम नहीं झुके
जहाँ झुकना था
तुम झुकते रहे
जहाँ कभी नहीं झुकना था।

तुमने
सम्मान किया पोर्नगालियों का
तिरस्कार किया सम्मान का
भंजन किया भरोसे का
इसलिए
हमारे लिए तो
हर पल मरते रहे हो तुम।

थाली के बैंगन से
तुम लुढ़कते रहे
इधर से उधर और उधर से इधर।
निष्प्रभावी रहे
हमारे अनुनय, विनय,
अनुरोध और प्रशंसा...
तुम
स्वेच्छा से पिछड़ते गये
बड़े गर्व से गिरते गये
सामान्य से अतिदलित तक,
और घिरते गये
अपने ही शब्दों से
अपनी ही परिभाषाओं से।
ओढ़ते रहे खोखली रजाइयाँ
होते रहे आत्ममुग्ध
अपनी ही बनी उपाधियों से।

जन्मना हो तुम भी
हमारी तरह
अजन्मा
कैसे हो गये?
जाओ
हम विदा देते हैं तुम्हें
अब मत आना कभी
लौटकर
इस धरती पर।
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4 घंटे पहले

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