ओ एक सवाल अना के सामने सज्दा-रेज़ हो गया,
ओ एक जवाब फ़ना में गुम, बे-आवाज़ हो गया।
रूह झुकी दर-ए-हक़ पर जब "कमरुन",
फ़लक भी उस इश्क़ की गवाही हो गया।।
-कमरुन नदाफ
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