मुस्कराते निकलोगे सड़कों पे तो आखों में आना लाजमी
और जो अपने सुख बता दिए तो आखों में आना लाजमी
सूख कर गिरते पत्तों को देखकर सबको सुकून मिलता है
और जो हरे भरे हो गए कभी तो आंखों में आना लाजमी
खाली नदियों पर घर बनाने की कला सीख गए है लोग
और जो लबालब हो गए फिर तो आंखों में आना लाजमी
तुम्हारा मौन सुहाने लगा है तुम्हारे चाहने वाले लोगों को
और जो मुखरित हो गए फिर तो आंखों में आना लाजमी
मैं भी नहीं चाहता किसी की आखों का तारा बनना अब
और जो बन गया कभी फिर तो आंखों में आना लाजमी
अब तो मैने अपनी लक्ष्मण रेखा खींच ली जीने के लिए
और जो बाहर निकला फिर तो आंखों में आना लाजमी
कमलेश जोशी कमल
कांकरोली राजसमंद
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