गुलशन भी वीराने निकले
सच सारे अफ़साने निकले
शीशों की ना समझी देखो
पत्थर को समझाने निकले
ज़ख़्मों का मजमा था दिल में
कांटे ही सहलाने निकले
सदियों के प्यासे सहरा को
बादल ये समझाने निकले
टूटे फूटे घर के अन्दर
पक्के सब तहखाने निकले
चोरी चोरी दिल को चुराया
अब दिल को लौटाने निकले
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