आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पावस ऋतु

                
                                                         
                            खिल रहे फूल संग कलियां मुस्काई,
                                                                 
                            
ऊपर बैठे भंवरे ने मीठी राग सुनाई।
काली घटा संग पावस ऋतु आई,
साथ में हरियाली और खुशहाली लाई।।
नाचे मोर पपेया कुके कोयल काली,
रिमझिम मेघा बरसे गाजे बादली काली।
खेतों में काम करे लोग लुगाई,
साथ में बाटी संग छाछ राबड़ी लाई।।
मूंग संग मोठ बाजरी बोई,
फलिया संग लोया और टिंडसी भायी।
गीत सुनाती कोयल काली ,
फूलो से भर जाती डाली।।
काली घटा संग पावस ऋतु आई,
साथ में हरियाली और खुशहाली लाई।।

कमल किशोर चिनियां
हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर