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ज़िंदगी का प्रश्नपत्र

                
                                                         
                            काश, ज़िंदगी के इम्तहान का
                                                                 
                            
प्रश्नपत्र कभी लीक होता,
मैं हर सवाल का उत्तर
पहले से तैयार कर लेता।

कहाँ ठोकर मिलेगी,
कहाँ कोई अपना छूटेगा,
किस मोड़ पर ख़ुशी मिलेगी,
कहाँ दिल चुपचाप टूटेगा—
सब कुछ पहले ही जान लेता।

मगर यहाँ तो अजब इम्तहान है,
अगल-बगल बैठे हर इंसान के
प्रश्न अलग-अलग हैं,
किसी की आँखों में आँसू हैं,
किसी के हिस्से में मुस्कान है।

कोई रिश्तों में उलझा है,
कोई सपनों से लड़ रहा है,
कोई अपनों को बचा रहा है,
तो कोई खुद को संभाल रहा है।

न कोई पाठ्यक्रम तय है,
न कोई मॉडल उत्तर मिलता है,
हर सुबह एक नया सवाल
हर दिन एक नया सबक मिलता है।

अब तो बस यही पता करना है—
ये प्रश्नपत्र तैयार कौन करता है?
कौन हर इंसान के हिस्से में
अलग-अलग सवाल भरता है?

शायद ऊपर बैठा कोई
हमारी कहानी लिखता है,
और हर सवाल के साथ
जीने का हुनर सिखाता है।

इसलिए अब प्रश्नपत्र लीक होने की
ख्वाहिश भी छोड़ दी है मैंने,
शायद ज़िंदगी का असली इम्तहान
उत्तर जानने में नहीं,
बिना जाने उत्तर खोजने में है।

—कमल किशोर झा 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 घंटे पहले

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