मिट्टी भी लाई, पहाड़ भी लाई
अपने साथ कहर हज़ार ले आई।
आज गलियों में सैलाब उतर आया,
हर आँख में एक सवाल ले आई।
जो बारिश कभी सुकून देती थी,
आज वो तबाही की बहार ले आई।
—कमल किशोर झा
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