झूठ नहीं बोल सकता मैं अपने किरदार से,
अल्फ़ाज़ बयां कर जाते हैं अपने ईमान को।
फासले तो बयां कर जाते हैं इन रास्तों को,
मगर किरदार गवाही दे जाता है इंसान को।
दुनिया की इस महफ़िल में अदाकार बहुत हैं,
सच को छुपाने वाले पैरोकार बहुत हैं।
पर साए से कभी असलियत छुपती नहीं,
झूठ के बाज़ारों में भी सच्चाई झुकती नहीं।
अल्फ़ाज़ तो महज़ एक ज़रिया हैं जज़्बात का,
असल मोल तो होता है नियत और बात का।
मंज़िलें कितनी भी दूर हों, रास्ते गवाही देते हैं,
पर मुसाफ़िर कैसा था, ये उसके छाले बताते हैं।
जब वक़्त की अदालत में गवाही का दौर आएगा,
न दौलत काम आएगी, न कोई पराया साथ निभाएगा।
तब खामोश खड़े रहकर भी जो सच उगल देगा,
वो तेरा किरदार ही होगा, जो तेरा नसीब बदल देगा|
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