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मुझे तैरना नहीं आता

                
                                                         
                            मुझे तैरना नहीं आता,
                                                                 
                            
इसलिए उथले पानी से भी डरती हूँ।
कहीं डूब न जाऊँ समंदर की गहराइयों में,
इसलिए अक्सर साहिल पर ही खड़ी रहती हूँ।

मालूम है मुझे, ऐ समंदर,
तेरी लहरें मुझे अपने आगोश में ले लेंगी,
और मैं बहती चली जाऊँगी तेरे साथ
क्योंकि तेरी चंचलता से उलझना
मुझे आता नहीं।

मैं तन्हा हूँ,
मुझे तन्हा ही रहने दे।
कि भीड़ में कुछ पल गुज़ार
फिर खामोशी में लौटना मुझे आता नहीं।

-जुही
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एक घंटा पहले

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