बात होगी..
सबको मालूम है हर सुबह के बाद बस रात होगी,
बड़ी बेबस सी हैँ आँखें आज कुछ तो बात होगी.
हम कभी सीख ना पाए के दगा कैसे करें
मिजाज-ऐ-इश्क की कुछ खास दवा कैसे करें
फुर्सतें मेरी वक़्त मेरा सबकुछ तेरा था,
जो बूढ़ी हो गयी यादें वो जवां कैसे करें..
अब बात जो आयी है तो तहकीकात भी होगी,
बड़ी बेबस सी हैँ आँखें आज कुछ तो बात होगी.
जरूरी है के हर पल याद तुमको बस मेरी आये
जो टूटे दिल तेरा आवाज तुमको बस मेरी आये
सबक ये लाजिमी है और मिलना भी जरूरी था
मोहब्बत भी जरूरी थी बिछडना भी जरूरी था..
मिलोगे जब दुबारा बातें सवालात की होंगी,
बड़ी बेबस सी हैँ आँखें आज कुछ तो बात होगी.
जितेंद्र कुमार मिश्रा
खुद की तन्हाई.. अकेले अहसास समंदर से
Alexandria Egypt
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