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बस देर नही’ उस वक्त में

                
                                                         
                            क्रोध का शैलाब
                                                                 
                            
जो उठा है तेरे रक्त में
आज ये तू जान ले
बस देर नही’ उस वक्त में
सूरज की लौ से
जो तपा तेरा शरीर है
बज्र से कठोर ये
ना कोई गुरूर है
इरादों का बजन
अपने सीने में उतार ले
जल रहे वतन को
आज तू सॅवार ले
मोह से परे
मृत्यु से अंजान है तू
रक्षक के रूप में
लगता बस भगवान है तू
उठा ले शस्त्र तू
बाहें अपनी खोल दे
शत्रुओ’ को ढेर कर
विजय व्दार खोल दे
क्रोध का शैलाब
जो उठा है तेरे रक्त में
आज ये तू जान ले
बस देर नही’ उस वक्त में
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11 घंटे पहले

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