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औरत

                
                                                         
                            रात मर्द की
                                                                 
                            
आज़ादी मर्द की
दुरदृष्टि मर्द की
घूँघट औरत का

नियम मर्द के
नियंत्रण मर्द का
शक़ मर्द का
अग्नि-परीक्षा औरत की

राजसभा मर्द की
खेल मर्द का
आत्मसम्मान मर्द का
चीर हरण औरत का

वासना मर्द की
इच्छा मर्द की
बेचैनी मर्द की
जिस्म औरत का

घर मर्द का
घरवाले मर्द के
भूख मर्द की
चूल्हा-चौका औरत का

धर्म मर्द का
समाज मर्द का
निर्णय मर्द का
पाबंदी औरत की

हक़ मर्द का
आवाज़ मर्द की
क्रोध मर्द का
सहनशीलता औरत की

त्याग औरत का
बंधन औरत का
धैर्य औरत का

और न जाने इस दुनिया के
कितने अपराध, कितने आरोप,
कितना दर्द—
सब औरत के हिस्से आए।

यह दुनिया मर्दों ने बनाई,
औरतें इसमें
बस साँस लेने भर को छोड़ी गईं।

इस दुनिया की हर औरत
मर्द बन जाना चाहती है—

पर कोई मर्द
औरत नहीं बनना चाहता।

मैं उसी दिन
इस दुनियाकी औरतों को आज़ाद मानूँगी—
जिस दिन इस दुनिया के हर मर्द
हर जन्म में
औरत बन जाना चाहेंगे।

-जया जायसवाल
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2 घंटे पहले

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