आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मां की ममता

                
                                                         
                            ये चंद पंक्तियां उसको भी ,
                                                                 
                            
जिसने हम सबको जन्म दिया l

सहकर उस गहरी पीड़ा को ,
कर पालन पोषण बड़ा किया l

इस मां की महिमा है अपार,
जिसका संरक्षण पाकर मैं जिया l

नयनों, धड़कन में बस मै हूं ,
ख्वाबों, जीवन में बसता हूं l

हम पर उसके अरमान टिके ,
हां तभी मुझे बस वही दिखे l

हो सुख या विपदा में साथ रहे,
अपनी तकलीफ स्वतः वो सहे l

हूं बेसल बेकार जमाने को,
वो कर तारीफ , शरीफ कहे l

चरणों में जिसके है जन्नत ,
आशीष से पूरी हर मन्नत l

है एक शख्सियत श्रष्टि में,
संपूर्ण विश्व जिसे " मां " ही कहे l

हर पल ममता की धार बहे ,
ये पुत्र भी मां को नमन करे ........l
-जय सिंह 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर