तू कहे तो कविता लिखना छोड़कर,
तेरे प्यार का इतिहास लिख दूं।
लिखकर क्या करूंगा तेरा खालीपन,
हर रोज तेरा रुदन व हास लिख दूं।
कुतुब मीनार, यह लाल किला सब बेकार।
तू कहे तो बुलंद दरवाजा तेरे आसपास लिख दूं।
वतन के हर कोने में ताजमहल बना दूं,
तू कहे तो तेरा नाम मुमताज लिख दूं।
-कापड़ी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X