है पार्थ को मालूम ये कि , सारथी उसका हरता सबकी बाधा है ।
पराजय का चिन्तन क्यो हो , विजय मात्र उसकी आभा है ।
विजय मात्र उसकी आभा है , मेरे पास तो फिर भी ज्यादा है ।
जिसके सारथी श्रीं कृष्ण हो , उस रथ का पताका ही विजय पताका है ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X