वो कहेंगे, राम नहीं है तुम्हारे,
तुम नहीं हो मुनि ऋषियों के वंशज,
लेकिन तुम इस मिट्टी को सुन ना,
राम तुम्हारे भी हैं, जितने दूसरों की,
उनका आदर्श, मर्यादा का रक्त तुम्हारे भीतर भी है,
तुम भी हो मुनि ऋषियों के वंशज,
जो दुनिया के लिए नए खोज करते हैं,
वैज्ञानिक, दार्शनिक बनके नए तथ्य बनाते हैं।
वो कहेंगे, कृष्ण नहीं है तुम्हारे,
सब मिथ्या है, प्रमाणिक इतिहास नहीं,
लेकिन तुम इस मिट्टी को सुन ना,
कृष्ण तुम्हारे भी हैं,
इस मिट्टी का इतिहास भी तुम्हारा ही है।
वो बार-बार कहेंगे,
वेद, उपनिषद, पुराणों तुम्हारे नहीं है,
ना ही रामायण, महाभारत तुम्हारे हैं,
वो सिर्फ हिंदुओं के धर्मग्रथ हैं,
लेकिन तुम अपने विवेक की सुन ना,
वे सभी तुम्हारे भी हैं, जितने हिंदुओं का है,
क्यों कि तुम भी इस मिट्टी के मानव हो,
जिसका मान रखना तुम्हारा कर्तव्य है,
उन्हें कहना, हाँ, यह सब धर्म ग्रंथ है,
लेकिन सिर्फ हिंदुओं के ही नहीं,
पूरे मानव सभ्यता की,
वे धरोहर है हमारे पूर्वजों की,
वे प्रतीक हैं उनके असीम ज्ञान की,
धर्म को रिलिजन से समान मत मानना,
धर्म से रिलिजन का कोई संपर्क नहीं है,
धर्म तो कर्तव्य को बतलाता है,
रिलिजन तो विश्वास को दर्शाता है।
वे फिर कहेंगे, भगवान नहीं है तुम्हारे,
तुम नहीं देव-देवताओं का अंश,
मंदिर नहीं है तुम्हारे लिए,
लेकिन तुम इस मिट्टी को सुन ना,
वे सभी तुम्हारे शक्तियों का प्रतीक हैं, तुम्हारे भीतर हैं,
मंदिर तुम्हारे लिए विज्ञान का उत्कृष्ट संग्रहालय है,
जो समाए रखी है ब्रह्मांड का गहन ज्ञान को।
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