उसे गुलाब पसंद हैं।
गर मैं देता गुलाब,
मुरझा जाते कुछ रोज़।
मैंने गुलाब के पौधे दिए,
ताकि वह चुन सके
अपनी पसंद का रंग,
कर सके इंतज़ार
फूलों के खिलने का,
महसूस कर सके ख़ुशबू,
निहार सके सुंदरता,
जी सके आत्मिक कोमलता।
साथ ही, वह जान सके
उन काँटों के बारे में भी,
जो गुलाब के जीवन का हिस्सा हैं।
जान सके—
गुलाब होना सिर्फ़ खिलना नहीं है,
धूप सहना भी है,
टूटना और मुरझाना भी है,
बावजूद इसके, हर मौसम में
खिलने की कोशिश करना भी है।
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