सिर पर आज़ादी का,
तिलक लगा रहे हैं।
हम राष्ट्रीय का अपने,
गुणगान गा रहे हैं।
मिली है जो आजादी,
जिन वीरो के है बल पर,
मिल कर हम सब उनकी,
महिमा सुना रहे हैं।
सिर पर आज़ादी का,
तिलक लगा रहे हैं।
हम राष्ट्रीय का अपने,
गुणगान गा रहे हैं।
यह दिन १५ अगस्त का भी,
इतिहास में अमर है,
अखंड भारत का,
ध्वज शान से शिखर है।
सिर पर आज़ादी का,
तिलक लगा रहे हैं।
हम राष्ट्रीय का अपने,
गुणगान गा रहे हैं।
नन्हे हाथों में भविष्य की,
संस्कृति सिखायी जाती,
जड़ों से वृक्ष की,
ऊंचाई बताई जाती,
ऐसा सुंदर भारत मां का,
आंगन खिला रहे हैं।
सिर पर आज़ादी का,
तिलक लगा रहे हैं।
हम राष्ट्रीय का अपने,
गुणगान गा रहे हैं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X