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लोक संस्कृति पर "गीत"

Lokgeet
                
                                                         
                            अवध काशी मथुरा देवां , महादेवा कहिए।
                                                                 
                            
प्रदेश का उत्थान होवे, काम ऐसा करिए।
अवध काशी मथुरा देवां , महादेवा कहिए।
प्रदेश का उत्थान होवे, काम ऐसा करिए।। १

मुख में हो राम नाम , रामायण हो हाथ में।
तू अकेला नाही प्यारे, यह देश है साथ में।
देश के सम्मान खातिर , हानि लाभ सहिए।
अवध काशी मथुरा देवां , महादेवा कहिए।
प्रदेश का उत्थान होवे, काम ऐसा करिए।। २

मिला नहीं आपस में तो, संभल नहीं पावेगा।
निज कौशल ज्ञान बल , सब  भूल जावेगा।
ईर्ष्या को त्याग पहले , मेल - जोल  करिए।
अवध काशी मथुरा देवां , महादेवा कहिए।
प्रदेश का उत्थान होवे ,  काम ऐसा करिए।। ३

देश की डोर सौंप ,  जन ता के साथ में।
कृषि काज करें चाहे,  चाकरी ले हाथ में।
फिर तो हम देश के , संवाहक बन जाएंगे।
राष्ट्रधर्म भाषा के हम , आदर्श कहलाएंगे।
ईर्ष्या को त्याग पहले , मेल - जोल करिए।
अवध काशी मथुरा देवां , महादेवा कहिए।
प्रदेश का उत्थान होवे, काम ऐसा करिए।। ४

बिरहा नौटंकी रासलीला, अंग अंग रंगिए ।
डीजे डिस्को छोड़ प्यारे , लोकरंग चखिए ।
भारतेंदु कबीर जायसी, निराला सा लिखिए ।
यह हमारी संस्कृति है ,  अभिमान करिए ।
अवध काशी मथुरा देवां , महादेवा कहिए।
प्रदेश का उत्थान होवे, काम ऐसा करिए।। ५


- रंजीत वर्मा "गुरुजी" 
 
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3 वर्ष पहले

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