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वो बचपन की यादें

                
                                                         
                            वो बचपन की यादें,
                                                                 
                            
वो स्कूल के दिन…
आज बस यादें बनकर रह गए,
वो साथ बचपन का,
एक ही बेंच पर बैठना,
बात-बात पर आपस में लड़ना,
और फिर पल भर में एक हो जाना…

एक-दूसरे का टिफिन खाना,
मैडम के क्लास में न होने पर
वो जमकर मस्ती करना,
ऐसा शोर मचाना कि
सज़ा में पूरी क्लास का खड़ा होना…

वो होमवर्क के बहाने
दोस्तों के घर जाना,
मिलकर बैठना,
काम पूरा करना…
और काम से ज़्यादा
मस्ती में वक्त बिताना।

यादें तो बहुत सी हैं,
कह दूँ अगर सारी,
तो ये पल भी कम पड़ जाएँ,
ये घंटे भी कम पड़ जाएँ…

आज आप लोगों से मिलने की खुशी,
किसी अनमोल चीज़ से कम नहीं,
क्योंकि कुछ रिश्ते
वक्त के साथ पुराने नहीं होते,
बल्कि और भी खास हो जाते हैं।

कुछ खास पल,
कुछ खास अपने,
और दोस्तों के साथ बिताए
वो सुनहरे दिन…

तो बताइए,
क्या ये सब किसी खूबसूरत अफ़साने से कम है?

वो बचपन फिर लौटकर तो नहीं आएगा,
लेकिन उसकी यादें…
आज भी चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं।
क्योंकि दोस्त वही हैं,
बस उम्र बदल गई है…
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2 घंटे पहले

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