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मेरा प्यारा गांव

                
                                                         
                            मेरा प्यारा गांव,
                                                                 
                            
लौटा दो मेरा गांव,
माता-पिता की छांव,
बचपन का चाव,
कुओं पर चलती लाव,
जिनके साथ बड़ा हुआ,
खेलकूद में अड़ा हुआ,
बिना बात लड़ा हुआ,
वह टूटा सा मंदिर,
पगडंडी,ग्वाले, गाते गीत,
पहाड़ों पर वृक्षों का समंदर,
सीधे-साधे पड़ोसी,
धोती पगड़ी वाले लोग,
वो गाली, बुड्ढों का डर,
कलेवा वो राबड़ी,
ब्यालू , कोऊ जलाते लोग,
गुड़गुड़ाते हुक्के,
बातों के छप्पन भोग,
टूटी झोपड़ी, बैलों की जोड़ी,
वो दंगल वो कुश्ती,
गांव की हस्ती,
बचपन की मस्ती,
बचा लो मेरा गांव,
लौटा दो मेरा गांव,
मेरा प्यारा गांव।

- हरिमोहन जांगिड़
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