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एक दौर जो आकर बीत गया

                
                                                         
                            एक दौर जो आकर बीत गया,
                                                                 
                            
हर चेहरे पे था मास्क लगा।
महसूस हुआ तब कौन सगा,
एक दौर जो आकर बीत गया।

स्मृति बड़ी विभत्स रही,
पहली बार थी ट्रेन खड़ी।
सूनी पड़ी थी रेल की पटरी,
हर आँख में थी नमी भरी।
जो अडिग रहा ओ जीत गया,
एक दौर जो आकर बीत गया।

अपने भी रहते दूर खड़े,
मिलने को मन मजबूर रहे।
जब अपने ही न पास रहे,
तो गैरों की फिर कौन कहे।
मन के भीतर अंकित हुआ।
एक दौर जो आकर बीत गया।

कितने अपने दूर हुए,
कितने सपने चूर हुए।
कितने चेहरे मौन हुए,
कितने रिश्ते मजबूर हुए।
यूँ कठिन समय अतीत हुआ,
वो दौर जो आकर बीत गया।
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15 घंटे पहले

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