"बैनजो महरानी गै"
चमकै हौ नथिया तोहर, नरबे तोहर कहानी गै,
तोरे तनके सौंसे गाम में सुनैछौ खिसा पिहानी गै
करेजाके खूनसँ चिठ्ठी लिख'लियौ, गै तोरे नामके
अथाह प्रेमके परताईर क' केल्या तों नादानी गै
तोरे आबैके लल'क में दिन रैत पेरा तकैछियौ
गौंज्याल तोहर अंग देखक' भावनामे उठै रवानी गै
कोन कुम्हार गढ'ल्कौ तोहर, अते निमन रूप हौ,
रैह रैहक' प्रीत उबाल मारै देखते तोहर जवानी गै
जीनगी हम तोरे बनेबौ, जुगजुग संगे जियैके आश है
लैड़ जेबौ दुनियाँ सँ तोरा खातिर ल'अनबौ निशानी गै
रोजे तो सैज सवैर क' निकाल नै एना प्राण हमर
कारी तोहर आँइखके जादू प' पतझरो लगै सुहानी गै
मन होइय' मैर जाउ! जखैन लोक देखैछौ अंग तोहर,
सुहकाइर ले प्रेमपत्र हमर बैनजो दिलके महरानी गै
शब्द रचना :- गुरु दयाल यदुवंशी ।
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