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अनंत लिखूं

                
                                                         
                            मैं जात में उसे परिजात रखूं!
                                                                 
                            
व्यक्ति में उसे,अभिव्यक्ति लिखूं।
मैं छन्न में उसे प्रच्छन्न रखूं!
गूढ़ में उसे मैं,, *निगूढ़*  लिखूं।
मैं शिष्ट में उसे, विशिष्ट रखूं!
स्वार्थ में उसे मैं,निस्वार्थ लिखूं।
मैं अलंकार में उसे, अलंकृत रखूं!
छंद में उसे मैं,,स्वच्छंद लिखूं।
मैं गीत में उसे संगीत रखूं!
कृत में उसे मैं,विस्तृत लिखूं।
मैं काम में उसे,निष्काम रखूं!
बंधन में उसे मैं, बंधनमुक्त लिखूं।
मैं मूल्यों में उसे,,अमूल्य रखूं!
रिक्त में उसे मैं,अतिरिक्त लिखूं।
मैं शेष में उसे,,विशेष रखूं!
कम में उसे मैं, सर्वम लिखूं।
मैं न्यून में उसे,,नगण्य रखूं!
अंत में उसे मैं,अनंत लिखूं।
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4 घंटे पहले

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