तू ही रानी, तू ही अहिल्या
तू ही पद्मावती है,
तू ही रजिया है सुल्ताना
दुनिया तेरा लोहा मानती है,
क्यूं सहती तू अत्याचार
क्यूं सहती तू शोषण है,
तू ही दुर्गा तू ही काली
तू दुष्टों को मिटा सकती है।
मत खोने देना अपना आत्मसम्मान
यही तो है तेरी पहचान,
यही तूझे तू है बनाता
यही है तेरे नाम की शान।
चल उठ पहचान खुद को
दुनिया में बता दे सबको,
जो करेगा तेरे स्वाभिमान से खिलवाड़
तू कर देगी उसका सर्वनाश।
तू अपनी शक्ति को पहचान
तू नही किसी से कम,
भुजाओं में है तेरी भी दम।
मत कर परवाह इस दुनिया की
ये नही हुई किसी की,
स्वाभिमान तेरा भी,बता दे सबको
आता है तूझे इसे बचाना दिखा दे सबको।
मिटा दे उसको जो करे आत्मसम्मान पे वार
तू नही कर सकती किसी की हार स्वीकार,
तू पहचान खुद को नारी है तू
अपनी पर आए तो महिषासुर को मिटा सकती है तू।
तू ही प्रकृति, तू ही सृष्टि
डरना तेरा काम नही,
तू कर सकती है राक्षसों का नाश
बस तुझको अपनी पहचान नही।
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