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मुझको हिंदुस्तान मिले

मुझको हिंदुस्तान मिले
                
                                                         
                            पुनर्जनम यदि होता है फिर, मुझको देश महान मिले
                                                                 
                            
उस परमेश्वर से विनती है, मुझको हिंदुस्तान मिले

इस धरती पर दुर्गा काली, और त्रिदेव भगवान चले
बलराम कृष्ण महाबीर बुद्ध, घुटनों के बल श्री राम चले
जो धरती देवों को प्यारी, उसमे ही स्थान मिले
उस परमेश्वर से विनती है मुझको हिंदुस्तान मिले…

इस धरती के कण कण में है, वीरों की फेहरिस्त बड़ी
नारी शक्ति दुर्गावती पदमिनी, झांसी वाली युद्ध लड़ी
गुरु तेगबहादुर बंदा सिंह, राणा प्रताप बलवान मिले
उस परमेश्वर से विनती है मुझको हिंदुस्तान मिले…

जिस धरा पे पत्थर पूजनीय, पेड़ों में ईश्वर बसते हों
जहाँ दीवाली में जगमग हो, होली में रंग बरसते हों
जहां नदियां पूजी जाती हों गंगा का निर्मल स्नान मिले
उस परमेश्वर से विनती है मुझको हिंदुस्तान मिले…

जीरो से हीरों तक की, पहचान जगत को जिसने दी
जीवों की उत्पत्ति से, उत्थान की कथा किसने की
आयुर्वेद योगासन वाला, आर्यावर्त महान मिले
उस परमेश्वर से विनती है मुझको हिंदुस्तान मिले…

मस्तक मुकुट हिमालय का, चरणों को सागर धोता हो
जिसके वीरों के शौर्य की गाथा ये संसार संजोता हो
उसी तिरंगे के आगे झुकने का फिर सम्मान मिले
उस परमेश्वर से विनती है मुझको हिंदुस्तान मिले…

दुर्गेश त्रिपाठी "कौशाम्बी" यूपी
 
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4 वर्ष पहले

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