गर ज़िंदगी, कभी नाच नचाये,
कोशिश करने पर भी, खूब भगाये,
थोड़ा ठहर कर, नाच लेना चाहिए ।
सेहत के लिए, थोड़ा भाग लेना चाहिए ।
आखिर, ज़िंदगी तुम्हारी है, तुम्हारी ही रहेगी,
एक दिन, थक हारकर,
और, ढेर सारे, नखरे दिखाकर,
वापस आ ही जाएगी ।
बस, अभी खेल रही है जिंदगी,
उसका खेल समझ, थोड़ा मुस्कुरा लेना चाहिए ।
सहना, कह देने से कहीं कठिन है, तो क्या,
एक दिन भोर होगी जरूर, शोर होगा जरूर,
अब खिलखिलाकर हँस भी देना चाहिए ।
गर ज़िंदगी, कभी नाच नचाये,
हंस कर उसके साथ, नाच लेना चाहिए ।
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