आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शिल्पकार

                
                                                         
                            ठहर जाती हैं आँखें तेरी सुंदर कुदरत की रचना को देखकर,हे प्रभु तू कितना गूढ़ शिल्पकार है,
                                                                 
                            
कहने को दुनिया में इंसानों के बनाए बहुत अचंभे हैं, पर तेरी रचना के आगे बौने सारे शिल्पकार हैं।
कितनी सुंदर तुमने धरती पर हर एक चीज़ बनाई है,कैसे तुमने इतनी विविध रंगों की प्रकृति सजाई है,
कहीं पर्वत कहीं पहाड़ कहीं नदी बनाई है कहीं मरुस्थल कहीं सागर तो कहीं धरती लह लहराई है।
अद्भुत अकल्पनीय अति सुंदर तुम्हारी ये कलात्मकता, बरबस ही इन आँखों में चमक बन उतर आयी है,
कितने प्यार से सींचा है तुमने ये ब्रह्मांड एक एक चीज़ बनाने में तुमने अवर्णनीय मनमोहक कुशलता दिखाई है।
 
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।  आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर