पुकार रहा हैं देश मेरा,तुम थाम लो तिरंगा हाथों में
देश में छिपे गद्दार बहुत हैं,तुम मत आना उनकी बातों में
जो शहीद हुए इस माटी पर,उनके सपनें तुम्हें सजाना हैं
संविधान के दुश्मनों से,यह देश तुम्हें बचाना हैं
गाँधी-आंबेडकर की जय का नारा,अब तुम्हें दोहराना हैं
जो देश तोड़ने निकले हैं,तुम्हें उन्हें सबक सिखाना हैं
आज़ादी का असली मतलब,जन-जन तक पहुँचाना हैं
दुश्मनों को हराकर,यह संविधान तुम्हें बचाना हैं
अखंड रहे यह देश अपना,एकता की यह डोर न टूटे
सदियों पुराना हैं भाईचारा,हाथों से यह हाथ न छूटे
जन जन को अधिकार मिले,हर जीवन को चमकाना हैं
गद्दारों की चाल मिटाकर,तुम्हें लोकतंत्र बचाना हैं
लहू बहा हैं हम सबका तभी तिरंगा पाया हैं
वलिदानों की निशानी हैं,तब यह गौरव लहराया हैं
कभी उलेमा कभी पुजारी,कभी किसान तो कभी व्यापारी
सभी के लहू से भीगी हैं मिट्टी,हुई हैं शहादत बारी बारी
जो लहू बहा हैं वीरों का,उस लहू को तुम सम्मान दो
आंच आये यदि वतन पर तो,प्राणों का वलिदान दो
गद्दारों की नस्ल छिपी है,भारत के घर - आँगन में
देशभक्ति की आड़ लेकर,यह फिर बहकाएंगे बातों में
गाँधी जी ने देश दिलाया,उनका यह अपमान हैं करते
कायरों को यह वीर बताकर,गद्दारों का सम्मान हैं करते
आज़ादी के संघर्ष में जो,अंग्रेज़ो के साथ खड़े थे
अंग्रेज़ों की सेना जाकर,नेताजी के विरुद्ध लड़े थे
कहीं भगत सिंह कहीं आज़ाद,कहीं बिस्मिल तो कहीं अशफ़ाक़
आज़ादी के लिए खूब लड़े,और वतन की ख़ातिर हो गए ख़ाक
आज पाखंडवाद बचाने वालें,संकट में देश को डाल रहे
हिटलर जैसी चाले चलकर,यह,मातृभूमि को बाँट रहे
राष्ट्रवाद के छद्म भेष में.यह बरगलाने तुम्हें फिर आएंगे
इनकी बातों में मत आना,यह गुलाम तम्हें बनाएंगे
हर गद्दार की साज़िश को,अब जड़ से तुम्हें मिटाना हैं
हर दुश्मन को धूलचटाकर ,तुम्हें भारत देश बचाना हैं
पुकार रहा हैं देश मेरा,तुम थाम लो तिरंगा हाथों में
देश में छिपे गद्दार बहुत हैं,तुम मत आना उनकी बातों में
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