बयां खुद को
हम न कर पाये
अब तक
समेटा बहुत खुद को
लफ़्ज़ों में हमने
फट भी गये
वरक़ बेबसी में
क्यों तलाशा
ख़ुदी को
ख़ुदी में ही
हमनें ।
- फौज़िया नसीम शाद
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