असमंजस की चादर खींच कर उतार दो सनम,
तेरी मुहब्बत कम्बख्त कभी चैन से सोने नहीं देती,
मुझ से बात किया करो सनम, तुम हकीम बातों से इलाज कर देती है सनम,
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