तुम बहुत हसीन हो, पर गुलाब नहीं, गुलाब तुम जैसी है,
तुम बहुत नाज़ुक हो, पर टूटती नहीं, ख्वाब तुम जैसी है,
तुम बोलो तो होंठों से तुम्हें पी जाऊं मैं,
क्यों कि सर से पांव तक तुम शराब नहीं, शराब तुम जैसी है,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X