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स्तुति मां पदमावती की

                
                                                         
                            दोहा
                                                                 
                            
प्रथम नमन अरिहंत देव को, दूजा सुमरन तेरा
लाखों तुमने तारे माता, अब है नंबर मेरा

माँ पद्मावती मेरे मन को, मान सरोवर करदे
ईर्ष्या द्वेष का रोग मिटाकर, इसमें अमृत भरदे

तेरे दरसन बिन माता यह , जीवन मेरा रुखा
ज्यूँ बिन वर्षा के चातक प्यासा, सावन बिल्कुल सूखा
मुझको माँ अब दरश दिखादे , चातक की तू प्यास बुझा दे
रिम झिम रिम करदे
माँ पद्मावती मेरे मन को, मानसरोवर करदे

इस धरती पर फैला अँधियारा , सत्य प्रेम ने किया किनारा
हिंसा झुंट का है यहाँ नारा, फस गया अब तू यहाँ बंजारा
मुझ को माँ तू पार लगादे, अंधकार जग का तू मिटा दे
जग मग जग कर दे
माँ पद्मावती मेरे मन को, मानसरोवर करदे
ईर्ष्या द्वेष का रोग मिटाकर, इसमें अमृत भरदे

~ डी के जैन
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2 वर्ष पहले

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