शेर संग मेमने ने दोस्ती की
अपनी ही मौत को दावत दी .
पानी घरों के ऊपर क्या चढ़ा
मुखौटों का चलन फिर बढ़ा.
उनके भी शौक कुछ अजीब हैं
नाप हर कदम की कई जरीब है .
इश्तिहारों से सारा शहर पट गया
अपराधियों से हर नेता सट गया.
विधायकों की जमात बेचैन हो गई
मंत्रियों की नई फिर से चेन हो गई.
-दिनेश चौहान
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