आजादी
जहां
बीता हुआ सपना है
दहशत में
जी रहा बस
एक गांव अपना है.
कम्मो की तरुणाई
मुखिया को रास आई
सुखिया की मजबूरी
राम नाम जपना है.
दहशत में
जी रहा
बस
एक गांव अपना है.
- दिनेश चौहान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X