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तुझको मैं हर बार लिखूं...

                
                                                         
                            तुझे इश्क़ लिखूं तुझे प्यार लिखूं ,
                                                                 
                            
तुझको मैं अपना संसार लिखूं........

तुझे प्रेम कहूं तुझको ही दुनिया,
तुझको अपना पालनहार लिखूं......

तुझे साथी बताऊं या परमेश्वर,
तुझे ईश्वर का उपहार लिखूं........

मुझे अश्क मिले तुझको खुशियां,
तेरे खातिर मैं अरदास लिखूं.........

मैं राम कहूं तुम हो कान्हा,
मैं मीरा सा इजहार लिखूं.........

सोचूं कुछ करूं कुछ और,
तुझको मैं हर बार लिखूं..........


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले

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