आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जीवन संघर्ष

                
                                                         
                            जीवन एक संघर्ष रण
                                                                 
                            
मनुष्य एक संघर्षशील गण
संघर्ष है जीवन सारा
जीवन सार संघर्ष हमारा
संघर्ष बिन जीवन आधा
तो क्यूँ संघर्ष में बाधा
जब संघर्ष है जीवन की पूर्णता तब
क्यूँ हो इसमें अपूर्णता
परिस्थितियाँ हो चाहे प्रतिकूल
परन्तु संघर्ष है एक साथी अनुकूल
संघर्ष की ऋणी सभ्यता सारी,
मनुष्यता हमारी
तब क्या बिसात हमारी
उठ कर संघर्ष प्रयत्न
सुखी रहना हो यदि जीवन पर्यंत
संघर्षमय हो मनोदशा संघर्षमय हो भावना
संघर्षमय हो कर्म सदा
बस यही है कामना, बस यही है कामना।


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर