जय गंगे मैया, आप पाप-निवारिणी,
मोक्ष-दायिनी, भवसागर-तारिणी॥
शिव-जटा-वासिनी, शुभ-सुख-कारिणी,
जन कल्याण हेतु, भूलोक-अवतारिणी॥
पराक्रमी भीष्म पितामह की, तुम जननी,
धरती की तृष्णा हरने वाली, संकट-भंजनी॥
भगीरथ के अथक तप का फल, प्रदायनी,
गौमुख से गंगासागर तक, जीवन-प्रवाहिनी॥
-देवेंद्र भण्डारी
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